Chapter 8 Verse 9

Kavim, puraanm, anushaasitaarm, anoH, aniyaansam, anusmaret,
YaH, sarvasya, dhaataarm, achintyaroopam, aadityavarnam, tamasH, parastaat ||9||

Translation: (Kavim) KavirDev i.e. Supreme God Kabir who becomes famous as a poet, He (puraanm) immemorial / eternal (anushaasitaarm) controller of all (anoH, aniyaansam) subtler than the subtlest (sarvasya) everyone’s (dhaataarm) sustainer (achintyaroopam) inconceivable (aadityavarnam) perpetually radiant like the sun (YaH) a worshipper who (tamasH) that darkness of ignorance (parastaat) beyond; Sachchidanandghan Parmeshwar / True happiness-giving Supreme God (anusmaret) remembers. (9)

Translation

Kavirdev i.e. Supreme God Kabir who becomes famous as a poet, He is immemorial, controller of all, subtler than the subtlest, inconceivable, perpetually radiant like the sun. He who (does sumiran of) remembers that Sachchidanandghan Parmeshwar (the true happiness-giving Supreme God) beyond the darkness of ignorance.


कविम्, पुराणम् अनुशासितारम्, अणोः, अणीयांसम्, अनुस्मरेत्,
यः, सर्वस्य, धातारम्, अचिन्त्यरूपम्, आदित्यवर्णम्, तमसः, परस्तात्।।9।।

अनुवाद: (कविम्) कविर्देव, अर्थात् कबीर परमेश्वर जो कवि रूप में प्रसिद्ध होता है वह (पुराणम्) अनादि, (अनुशासितारम्) सबके नियन्ता (अणोः, अणीयांसम्) सूक्ष्मसे भी अति सूक्ष्म, (सर्वस्य) सबके (धातारम्) धारण-पोषण करने वाला (अचिन्त्यरूपम्) अचिन्त्य-स्वरूप (आदित्यवर्णम्) सूर्यके सदृश नित्य प्रकाशमान है (यः) जो साधक (तमसः) उस अज्ञानरूप अंधकारसे (परस्तात्) अति परे सच्चिदानन्दघन परमेश्वरका (अनुस्मरेत्) सुमरण करता है। (9)

केवल हिन्दी अनुवाद: कविर्देव, अर्थात् कबीर परमेश्वर जो कवि रूप से प्रसिद्ध होता है वह अनादि, सबके नियन्ता सूक्ष्मसे भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करनेवाले अचिन्त्य-स्वरूप सूर्यके सदृश नित्य प्रकाशमान है। जो उस अज्ञानरूप अंधकारसे अति परे सच्चिदानन्दघन परमेश्वरका सुमरण करता है। (9)

Sat Bhakti Sandesh