Hindi

श्रीमद भगवद गीता

संत रामपाल जी महाराज द्वारा गीत का सरल व यथार्थ सरलार्थ।

कृपया पढ़िये गीता के सर्व श्लोकों का यथार्थ सरलार्थ संत रामपाल जी द्वारा जिस को पढ़ने व समझने से प्राणी पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।

English

Shrimad Bhagavad Gita

The most accurate and precise interpretation of Srimad Bhagavad Gita in the world has been done by Sant Rampal Ji Maharaj. This is the one and only correct interpretation of Srimad Bhagavad Gita

Bhagavad Gita Books - Hindi

गीता तेरा ज्ञान अमृत

आप जी को इस पुस्तक ’’गीता तेरा ज्ञान अमृत’’ में जानने को मिलेगा कि प्रमाणित शास्त्रा कौन से हैं जिनके अनुसार साधना करें? शास्त्राविधि अनुसार साधना कौन सी है? उस साधना को करने की विधि कैसी है, किस महात्मा से प्राप्त होगी, पूर्ण गुरू की क्या पहचान है?, वह भी इसी पुस्तक में आप पढ़ेंगे।

गरिमा गीता की

इस पुस्तक में श्रीमद्भगवत गीता के सम्पूर्ण ज्ञान का यथार्थ प्रकाश किया गया है जो गीता से 18 अध्यायों के 700 श्लोकों का हिन्दी सारांश है।

गरिमा गीता की - Hindi

गरिमा गीता की

इस पुस्तक में श्रीमद्भगवत गीता का सम्पूर्ण सारांश है जिसमें प्रत्येक अध्याय का भिन्न-भिन्न विश्लेषण किया गया है। विश्व में एकमात्रा गीता का यथार्थ प्रकाश किया गया है। मुझ दास (रामपाल) के अतिरिक्त वर्तमान तक गीता के गूढ़ रहस्यों को कोई उजागर नहीं कर सका। सभी ने कुछ शब्दों के अर्थ भी गलत किए हैं तथा श्लोकों का भावार्थ ही बदल दिया। उदाहरण के लिए गीता अध्याय 18 श्लोक 66 का भावार्थ है कि गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में जाने के लिए कहा है। व्रज का अर्थ जाना है, परंतु मेरे अतिरिक्त सर्व अनुवादकों ने ‘‘व्रज’’ का अर्थ आना किया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि गीता अध्याय 18 के ही श्लोक 62 में स्पष्ट व ठीक अर्थ किया है कि गीता बोलने वाले काल ब ्रह्म ने अपने से अन्य परम अक्षर ब्रह्म यानि परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है। वह परमेश्वर कौन है? इसका ज्ञान हिन्दू गुरूओं को नहीं है। जिस कारण से भोली जनता को भ्रमित करते रहे हैं कि श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान बोला तथा अपनी ही शरण में आने के लिए कहा है। जबकि अनेकों अध्यायों के श्लोकों में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य उत्तम पुरूष यानि पुरूषोत्तम अविनाशी परमेश्वर के विषय में स्पष्ट कहा कि वही परमात्मा कहा जाता है। तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है। प्रमाण - गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में। इसके अतिरिक्त गीता अध्याय 8 श्लोक 3 में उसे परम अक्षर ब्रह्म कहा है। इसी अध्याय के श्लोक 8, 9, 10 में उस दिव्य परमपुरूष की भक्ति करने से साधक उसी को प्राप्त होता है। इसी अध्याय 8 के श्लोक 20, 21, 22 में उसी अन्य अमर परमात्मा (सत्य पुरूष) की महिमा कही है जो इस पवित्र पुस्तक में पढ़ने को मिलेंगे। आप अपने को धन्य समझेंगे।

हिन्दू धर्मगुरूओं को यह भी ज्ञान नहीं है कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके काल ब्रह्म ने कहा था। जैसे प्रेत किसी के शरीर में प्रवेश करके बोलता है। पढ़ें प्रमाण सहित सत्य गीता सार।