Chapter 8 Verse 2

AdhiyagyaH, katham, kaH, atr, dehe, asmin, madhusudan,
Pryaankaale, ch, katham, gyeyH, asi, niyataatmbhiH ||2||

Translation: (Madhusudan) Oh Madhusudan! (atr) here (AdhiyagyaH) Adhiyagya (kaH) who is and he (asmin) this (dehe) in body (katham) how is (ch) and (niyatatmbhiH) by men who have engrossed minds (pryaankaale) in the last moments / at the time of death (katham) how (gyeyH) known (asi) is. (2)

Translation

Oh Madhusudan! Who is Adhiyagya here, and how is He in this body? And how is He known at the time of death by men who have engrossed minds.


अधियज्ञः, कथम्, कः, अत्रा, देहे, अस्मिन्, मधुसूदन,
प्रयाणकाले, च, कथम्, ज्ञेयः, असि, नियतात्मभिः।।2।।

अनुवाद: (मधुसूदन) हे मधुसूदन! (अत्रा) यहाँ (अधियज्ञः) अधियज्ञ (कः) कौन है और वह (अस्मिन्) इस (देहे) शरीरमें (कथम्) कैसे है? (च) तथा (नियतात्मभिः) युक्त चितवाले पुरुषोंद्वारा (प्रयाणकाले) अन्त समयमें (कथम्) किस प्रकार (ज्ञेयः) जाननेमें आते (असि) हैं। (2)

केवल हिन्दी अनुवाद: हे मधुसूदन! यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस शरीरमें कैसे है? तथा युक्त चितवाले पुरुषोंद्वारा अन्त समयमें किस प्रकार जाननेमें आते हैं। (2)

Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 2