Chapter 18 Verse 5

YagyadaantapHkarm, na, tyaajyam, kaaryam, ev, tat,
YagyaH, daanm, tapH, ch, ev, paavnaani, maneeshinaam ||5||

Translation: (YagyadaantapHkarm) the acts of yagya, charity and austerity (na, tyaajyam) should not be relinquished, rather (tat) they (ev) must / definitely (kaaryam) be performed because (yagyaH) yagya (daanm) charity (ch) and (tapH) austerity (ev) acts only (maneeshinaam) wise men (paavnaani) are the purifiers. (5)

Translation

The acts of yagya, charity and austerity should not be relinquished; rather, they must be performed because the acts of yagya, charity and austerity only are the purifiers of the wise men.

Important

Here, the meditation (tap) done by hathyog is not mentioned; here, there is mention of the austerity (tap) described in Gita Adhyay 17 Shlok 14 to 17.


यज्ञदानतपःकर्म, न, त्याज्यम्, कार्यम्, एव, तत्,
यज्ञः, दानम्, तपः, च, एव, पावनानि, मनीषिणाम्।।5।।

अनुवाद: (यज्ञदानतपःकर्म) यज्ञ, दान और तपरूप कर्म (न, त्याज्यम्) त्याग करनेके योग्य नहीं है बल्कि (तत्) वह तो (एव) अवश्य (कार्यम्) कर्तव्य है क्योंकि (यज्ञः) यज्ञ (दानम्) दान (च) और (तपः) तप (एव) ही कर्म (मनीषिणाम्) बुद्धिमान् पुरुषोंको (पावनानि) पवित्रा करनेवाले हैं। (5)

विशेष:- यहाँ पर हठयोग द्वारा किया जाने वाले तप के विषय में नहीं कहा है यहाँ पर गीता अध्याय 17 श्लोक 14 से 17 में कहे तप के विषय में कहा है।

Gita | गीता - adhyay-18

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