Chapter 17 Verse 4

Bhagavad Gita Chapter 17 Verse 4

Yajante, SaattvikaH, devaan, yaksharakshaansi, RaajsaH,
Pretaan, bhootganaan, ch, anye, yajante, TaamsaH, janaaH ||4||

Translation: (SaattvikaH) Satvik men (devaan) gods like Shri Brahma Ji, Shri Vishnu Ji, Shri Shiv Ji etc (yajante) worship (RaajsaH) Rajas men (yaksharakshaansi) Yakshas and the demons and (anye) others who (TaamsaH) Tamas (janaaH) men, they (pretaan) spirits (ch) and (bhootganaan) ghosts (yajante) worship and also chiefly regard Shri Shiv Ji as their deity. (4)

Translation

Satvik men worship gods like, Shri Brahma Ji, Shri Vishnu Ji and Shri Shiv Ji etc. Rajas men worship yakshas and demons, and the others who are Tamas men, they worship spirits and ghosts and also chiefly regard Shri Shiv Ji as their deity.


यजन्ते, सात्त्विकाः, देवान्, यक्षरक्षांसि, राजसाः,
प्रेतान्, भूतगणान्, च, अन्ये, यजन्ते, तामसाः, जनाः।।4।।

अनुवाद: (सात्त्विकाः) सात्विक पुरुष (देवान्) श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी, श्री शिव जी आदि देवताओं को (यजन्ते) पूजते हैं, (राजसाः) राजस पुरुष (यक्षरक्षांसि) यक्ष और राक्षसोंको तथा (अन्ये) अन्य जो (तामसाः) तामस (जनाः) मनुष्य हैं वे (प्रेतान्) प्रेत (च) और (भूतगणान्) भूतगणोंको (यजन्ते) पूजते हैं तथा मुख्य रूप से श्री शिव जी को भी इष्ट मानते हैं। (4)

केवल हिन्दी अनुवाद: सात्विक पुरुष श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी, श्री शिव जी आदि देवताओं को पूजते हैं, राजस पुरुष यक्ष और राक्षसोंको तथा अन्य जो तामस मनुष्य हैं वे प्रेत और भूतगणोंको पूजते हैं तथा मुख्य रूप से श्री शिव जी को भी इष्ट मानते हैं। (4)